→ हमारी Full Disclaimer पढ़ें
भारत में हज़ारों कंपनियां listed हैं। हर कंपनी की रिपोर्ट पढ़ना किसी के बस की बात नहीं। Stock Screener इसी भीड़ को छांटने का औज़ार है: आप शर्तें लिखते हैं, और वह सिर्फ़ उन कंपनियों की छोटी सूची दिखाता है जो शर्तें पूरी करती हैं।
पर यहीं एक जाल भी है। शुरुआती निवेशक screen का नतीजा देखकर उसे “खरीदने की सूची” समझ लेते हैं। यह पोस्ट आपको दोनों सिखाएगी: Screener.in पर screen बनाना और उसके नतीजे को सही तरह पढ़ना। साथ में 5 शुरुआती screens हैं, जिन्हें आप कॉपी करके चला सकते हैं।
| Key Takeaways Screener सिर्फ़ छंटनी करता है। वह यह नहीं बताता कि कौन-सा स्टॉक खरीदना है।Screener.in पर free account से भी custom screen बनाई और चलाई जा सकती है। Results को Excel में download करना premium सुविधा है।Query में हर शर्त AND से जुड़ती है। Market Capitalization करोड़ रुपये में लिखी जाती है।नीचे की 5 screens शुरुआती बिंदु हैं। उनके आंकड़े (thresholds) सिफ़ारिश नहीं हैं, आप उन्हें बदल सकते हैं।Banks और NBFC पर Debt to equity जैसे ratios सीधे लागू नहीं होते। उन्हें अलग से देखना चाहिए।Screen पास करने के बाद भी 5 साल की रिपोर्ट, cash flow और promoter की स्थिति हाथ से जांचनी ज़रूरी है। |
| सीधा जवाब Screener.in पर free account बनाइए, नई screen खोलिए, query box में शर्तें AND से जोड़कर लिखिए (जैसे Return on capital employed > 18 AND Debt to equity < 0.5), query चलाइए और screen को नाम देकर save कर लीजिए। नतीजे में आई कंपनियां सिर्फ़ आगे की जांच की सूची हैं, खरीदने की सलाह नहीं। |
Stock Screener क्या है, और क्या नहीं
Screener एक फ़िल्टर है। आप कहते हैं “मुझे वे कंपनियां दिखाओ जिनका कर्ज़ कम हो और जिनका मुनाफ़ा सालों से बढ़ रहा हो”, और वह हज़ारों में से कुछ दर्जन नाम सामने रख देता है।
वह क्या नहीं करता: वह कंपनी की ईमानदारी, मैनेजमेंट की नीयत, अकाउंटिंग की गड़बड़ी या भविष्य की तस्वीर नहीं बताता। उसके सारे आंकड़े पीछे के हैं। इसलिए screener को “खोजने का औज़ार” समझिए, “फ़ैसला लेने की मशीन” नहीं।
कौन-सा Screener चुनें — Screener.in या Chartink
| Screener.in | Chartink | |
| किसके लिए | कंपनी की बिक्री, मुनाफ़ा, कर्ज़ और ratios पर आधारित (fundamental) छंटनी | कीमत, volume और indicator पर आधारित (technical) scans |
| Free में | Custom screens बनाना और चलाना; 2 screen alerts | Scans और charts |
| Paid में | ज़्यादा alerts, results का Excel export। एक तुलना-लेख (अक्टूबर 2026) के अनुसार ₹4,999 प्रति वर्ष | Alerts और automatic refresh जैसी सुविधाएं। प्लान के दाम तुलना-लेख में दिए हैं |
| यह पोस्ट | 5 screens इसी पर | सिर्फ़ ज़िक्र |
दाम और सीमाएं बदलती रहती हैं, इसलिए खाता बनाते समय साइट पर मौजूदा शर्तें खुद देख लीजिए। Results का Excel export Screener.in की सपोर्ट-पेज के अनुसार premium सुविधा है।
Screener.in पर पहली Screen Setup करने के स्टेप
- स्टेप 1: Screener.in खोलिए और free account बना लीजिए (ईमेल से लॉगिन)।
- स्टेप 2: ऊपर के मेन्यू में Screens खोलिए और नई screen बनाने का विकल्प चुनिए। बटन का नाम थोड़ा अलग दिख सकता है।
- स्टेप 3: खुलने वाले query box में नीचे की किसी screen की शर्तें कॉपी करके चिपका दीजिए।
- स्टेप 4: Run बटन दबाइए। नीचे कंपनियों की सूची तालिका में आ जाएगी।
- स्टेप 5: अगर कोई शब्द पहचाना न जाए और error आए, तो box के पास “Show all variables” बटन दबाकर सही नाम देखिए और वही लिखिए।
- स्टेप 6: screen को नाम देकर Save कीजिए, ताकि अगली बार एक क्लिक में चल जाए।
- स्टेप 7: सूची की कंपनी पर क्लिक करके उसके पन्ने पर पांच साल के आंकड़े देखिए।
Query लिखने के 5 बुनियादी नियम
- हर शर्त अलग पंक्ति में लिखिए और बीच में AND लगाइए। सबसे आखिरी शर्त के बाद AND नहीं आता।
- Market Capitalization करोड़ रुपये में है। Market Capitalization > 1000 का मतलब ₹1,000 करोड़ से बड़ी कंपनी।
- संख्या बिना कॉमा के लिखिए। प्रतिशत वाले आंकड़े सीधे 15 जैसे लिख सकते हैं।
- शर्तों के नाम वैसे ही लिखिए जैसे Screener.in में हैं (जैसे Return on capital employed, Debt to equity, PEG Ratio)।
- एक बार में बहुत सारी शर्तें मत लगाइए। जितनी ज़्यादा शर्तें, उतनी खाली सूची।
5 Starter Screens
| पहले यह पढ़ें नीचे की शर्तों के आंकड़े शिक्षा के लिए चुने गए शुरुआती बिंदु हैं, किसी स्टॉक की सिफ़ारिश नहीं। मैं यहां असली नतीजों की सूची नहीं दे रही, क्योंकि वह रोज़ बदलती है और आपको अपनी screen खुद चलानी चाहिए। हर screen को चलाकर देखिए और ज़रूरत हो तो आंकड़े बदलिए। नाम में कोई फ़र्क हो तो “Show all variables” देखिए। |
Screen 1 — Quality Compounder
मकसद: ऐसी कंपनियां जो पूंजी पर अच्छा रिटर्न कमाती हैं, कर्ज़ कम रखती हैं और सालों से बढ़ रही हैं।
| Market Capitalization > 1000 AND Return on capital employed > 18 AND Return on equity > 15 AND Debt to equity < 0.5 AND Sales growth 5Years > 12 AND Profit growth 5Years > 12 |
हाथ से ज़रूर जांचें: पिछले 5 सालों में मुनाफ़ा लगातार बढ़ा या एक साल की उछाल से औसत ऊपर गया, और operating cash flow मुनाफ़े के आसपास है या नहीं।
इस screen की कमज़ोरी: ऐसी कंपनियां अक्सर पहले से महंगी हो चुकी होती हैं। Screen कीमत की चिंता नहीं करती।
Screen 2 — कम कर्ज़ + मज़बूत Promoter
मकसद: लगभग कर्ज़-मुक्त कंपनियां जिनमें promoter का बड़ा हिस्सा है।
| Market Capitalization > 500 AND Debt to equity < 0.1 AND Return on capital employed > 15 AND Promoter holding > 50 |
हाथ से ज़रूर जांचें: Promoter ने अपने shares गिरवी तो नहीं रखे, और holding हाल के सालों में घटी तो नहीं।
इस screen की कमज़ोरी: कम कर्ज़ का मतलब अच्छा कारोबार नहीं है। कमज़ोर कारोबार भी बिना कर्ज़ के हो सकता है।
Screen 3 — वाजिब दाम पर Growth (PEG)
मकसद: तेज़ी से बढ़ती कंपनियां जिनका दाम उनकी growth के मुकाबले बहुत ऊंचा न हो। PEG Ratio यही मापता है।
| Market Capitalization > 500 AND PEG Ratio < 1.5 AND Profit growth 3Years > 15 AND Return on equity > 15 AND Debt to equity < 1 |
हाथ से ज़रूर जांचें: Growth आगे भी टिकेगी या यह किसी एक सौदे या एक बार की कमाई से आई थी।
इस screen की कमज़ोरी: PEG, पुरानी growth पर टिका है। Growth रुकी तो PEG का अंदाज़ा बेकार हो जाता है।
Screen 4 — Industry से सस्ती कंपनियां
मकसद: ऐसी कंपनियां जिनका P/E अपने industry के औसत से कम है, पर जो ठीक-ठाक कमा रही हैं।
| Market Capitalization > 500 AND Price to Earning < Industry PE AND Return on capital employed > 15 AND Debt to equity < 1 AND Profit growth 3Years > 10 |
हाथ से ज़रूर जांचें: कंपनी सच में सस्ती है या उसमें कोई छिपी समस्या है। सस्ते दाम की वजह अक्सर वहीं मिलती है।
इस screen की कमज़ोरी: सस्ता दिखना “Value Trap” भी हो सकता है, यानी ऐसा स्टॉक जो सस्ता ही रहता है या और गिरता है।
Screen 5 — सुधरते नतीजे
मकसद: ऐसी कंपनियां जिनके हाल के तिमाही नतीजों में तेज़ मुनाफ़ा-वृद्धि दिख रही हो।
| Market Capitalization > 500 AND YOY Quarterly profit growth > 20 AND Sales growth 3Years > 15 AND Return on equity > 12 AND Debt to equity < 1 |
हाथ से ज़रूर जांचें: तिमाही का उछाल असली कारोबार से आया या किसी एक बार की आमदनी से। यह तिमाही की रिपोर्ट में देखें।
इस screen की कमज़ोरी: एक तिमाही का आंकड़ा शोर भी हो सकता है। इसे अकेला आधार मत बनाइए।
| Banks और NBFC पर ध्यान दें Bank और NBFC का कारोबार ही कर्ज़ का है, इसलिए उन पर Debt to equity और ROCE जैसी शर्तें अकसर भ्रामक नतीजा देती हैं। इन screens में अक्सर वे बाहर रह जाएंगे। Financial कंपनियों को परखने के लिए अलग ratios (जैसे NPA और net interest margin) देखने पड़ते हैं, जो इस पोस्ट का हिस्सा नहीं हैं। |
Real Worked Example — एक Screen का नतीजा हाथ से जांचना
| ध्यान दें ABC Ltd एक काल्पनिक कंपनी है और नीचे के सारे आंकड़े समझाने के लिए बनाए गए हैं। ये किसी असली कंपनी की जानकारी नहीं हैं। |
मान लीजिए Screen 1 और Screen 3 चलाने पर ABC Ltd का नाम आया। अब हम हाथ से जांचते हैं कि क्या Screener के आंकड़े सही हैं, और कंपनी वाकई उन शर्तों पर खरी उतरती है।
स्टेप 1 — कंपनी के आंकड़े (काल्पनिक):
| आंकड़ा | मान |
| Market Capitalization | ₹3,200 करोड़ |
| EBIT (ब्याज और टैक्स से पहले का मुनाफ़ा) | ₹120 करोड़ |
| Capital Employed | ₹500 करोड़ |
| Net Profit | ₹100 करोड़ |
| Equity (शेयरधारकों की पूंजी) | ₹400 करोड़ |
| कुल कर्ज़ | ₹60 करोड़ |
| 5 साल की औसत Sales growth | 18% |
| 5 साल की औसत Profit growth | 22% |
स्टेप 2 — ratios निकालना:
| Ratio | हिसाब | नतीजा |
| ROCE | 120 ÷ 500 | 24% |
| ROE | 100 ÷ 400 | 25% |
| Debt to equity | 60 ÷ 400 | 0.15 |
| P/E | 3,200 ÷ 100 | 32 |
| PEG | 32 ÷ 22 (Profit growth) | 1.45 |
स्टेप 3 — Screen 1 से मिलान: ROCE 24 > 18 ✓, ROE 25 > 15 ✓, Debt to equity 0.15 < 0.5 ✓, Sales growth 18 > 12 ✓, Profit growth 22 > 12 ✓, Market Cap 3,200 > 1,000 ✓। कंपनी पास है।
स्टेप 4 — Screen 3 से मिलान: PEG 1.45 < 1.5 ✓। पास है, पर बस हल्के अंतर से। अगर कीमत थोड़ी भी बढ़ती, तो यह कंपनी PEG वाली screen से बाहर हो जाती।
स्टेप 5 — हाथ की जांच। अब Screener के बाहर के सवाल पूछिए। मान लीजिए आपको मिला कि Operating cash flow ₹90 करोड़ है और मुनाफ़ा ₹100 करोड़, यानी 90%। यह ठीक संकेत है। Promoter holding 58% है और कोई pledge नहीं। पर कंपनी के Debtor days (ग्राहकों से पैसा आने के दिन) 5 साल पहले के 60 से बढ़कर 95 हो गए हैं।
बढ़ोतरी = (95 − 60) ÷ 60 = लगभग 58%। यानी कंपनी अब बिक्री का पैसा पहले से डेढ़ गुना ज़्यादा समय में वसूल रही है। यह चेतावनी का संकेत है: या तो ग्राहक देर से चुका रहे हैं, या कंपनी बिक्री बढ़ाने के लिए उधार ज़्यादा दे रही है।
स्टेप 6 — नतीजा। Screen ने कंपनी को पास किया, पर हाथ की जांच में एक गंभीर सवाल निकला। सही कदम खरीदना नहीं, बल्कि यह पता करना है कि Debtor days क्यों बढ़े। जवाब न मिले तो इसे सूची से हटाइए। यही Screener का असली काम है: आपका समय बचाना, फ़ैसला देना नहीं।
Screen के बाद की 6-बिंदु जांच
- 5 साल की Sales और Profit: लगातार बढ़ रही हैं या बीच में झटके हैं।
- Operating cash flow: मुनाफ़े के आसपास है या मुनाफ़ा सिर्फ़ कागज़ पर है।
- Promoter holding और pledge: holding घट रही है या shares गिरवी हैं।
- Debtor days और Inventory: क्या वे बिना वजह बढ़ रहे हैं।
- कारोबार की समझ: क्या आप एक वाक्य में बता सकते हैं कि कंपनी पैसा कैसे कमाती है।
- दाम: अपने आंकड़ों के मुकाबले P/E और PEG कहां हैं, और उसी industry की दूसरी कंपनियों से तुलना।
| Common गलतियां Screen की सूची को सीधा खरीद-सूची समझ लेना।बहुत ज़्यादा शर्तें लगाकर सूची खाली कर देना, फिर शर्तें ढीली करते-करते बेकार नाम पकड़ लेना।बैंकों और NBFC पर वही शर्तें लगा देना जो निर्माण या FMCG कंपनियों पर लगती हैं।एक साल के आंकड़े (या एक तिमाही) के उछाल पर भरोसा कर लेना।सस्ते P/E को अपने आप मौका मान लेना, जबकि वह Value Trap हो सकता है।Screen एक बार चलाकर सालों तक बदलना ही नहीं। आंकड़े हर तिमाही बदलते हैं।Micro-cap कंपनियां छांट लेना, जहां trading volume कम होने से बेचना मुश्किल हो सकता है। |
Quick Glossary
Stock Screener — शर्तें लिखकर हज़ारों कंपनियों में से कुछ चुनने का औज़ार।
ROCE — कंपनी की कुल पूंजी पर operating मुनाफ़े का प्रतिशत।
ROE — शेयरधारकों की पूंजी पर कमाए गए मुनाफ़े का प्रतिशत।
Debt to Equity — कुल कर्ज़ को शेयरधारकों की पूंजी से भाग देने पर मिली संख्या।
PEG Ratio — P/E को मुनाफ़े की वृद्धि दर से भाग देने पर मिली संख्या। 1 के आसपास को अक्सर संतुलित माना जाता है।
Promoter Holding — कंपनी में संस्थापक या उनके समूह का हिस्सा।
Pledge — Promoter द्वारा अपने shares को कर्ज़ के बदले गिरवी रखना।
Value Trap — ऐसा स्टॉक जो सस्ता दिखता है, पर सस्ता इसलिए है कि कारोबार कमज़ोर है।
| Investor Tip हर screen को एक कॉपी में अपने नोट्स के साथ रखिए: कब चलाई, कितने नाम आए, और आपने किन्हें क्यों हटाया। तीन महीने बाद वही नोट्स बताएंगे कि आप कहां जल्दबाज़ी करते हैं। |
शोध के बाद खाता कैसे चुनें
जब आपकी सूची की जांच पूरी हो जाए और आप असल में निवेश करना चाहें, तब इन प्लेटफ़ॉर्म की सुविधाएं और शुल्क तुलना करके देखिए: Zerodha, Groww और Angel One। ये affiliate links हैं। इनसे खाता खोलने पर हमें कमीशन मिल सकता है, आपको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता।
यह भी पढ़ें: Position Sizing — एक Trade में कितना पैसा लगाएं | Trading Plan कैसे बनाएं (Template के साथ) | Backtesting कैसे करें — बिना Coding के | Stock Market के 200 जरूरी टर्म्स।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Stock Screener क्या होता है?
एक ऑनलाइन औज़ार जिसमें आप शर्तें (जैसे कम कर्ज़, ऊंचा ROE) लिखते हैं और वह हज़ारों कंपनियों में से उन्हीं को दिखाता है जो शर्तें पूरी करती हैं।
क्या Screener.in free है?
Free खाते से custom screen बनाई और चलाई जा सकती है। Results को Excel में download करना और ज़्यादा alerts जैसी सुविधाएं premium में हैं। दाम और सीमाएं बदल सकती हैं, इसलिए साइट पर देख लें।
क्या Screen की सूची से सीधे स्टॉक खरीद सकते हैं?
नहीं। Screen सिर्फ़ पुराने आंकड़ों के आधार पर नाम छांटती है। कंपनी का कारोबार, cash flow, promoter और दाम की जांच के बाद ही कोई फ़ैसला लें।
Screener.in में query में error आए तो क्या करें?
ज़्यादातर मामलों में शर्त का नाम गलत होता है। query box के पास “Show all variables” दबाकर सही नाम देखिए और वही लिखिए। साथ में देखिए कि हर पंक्ति के बाद AND है और आखिरी पंक्ति पर नहीं।
Screener.in और Chartink में क्या फ़र्क है?
Screener.in कंपनी के वित्तीय आंकड़ों (fundamental) पर छंटनी के लिए है, और Chartink कीमत, volume और indicator (technical) पर scans के लिए। दोनों के सवाल अलग हैं, इसलिए कई लोग दोनों इस्तेमाल करते हैं।
कितनी शर्तें लगानी चाहिए?
शुरुआत में 4 से 6 शर्तें काफ़ी हैं। बहुत ज़्यादा शर्तों से सूची खाली हो जाती है या सिर्फ़ संयोग से बचे नाम मिलते हैं।
Screen कितनी बार चलानी चाहिए?
कंपनियों के नतीजे हर तिमाही आते हैं, इसलिए तिमाही में एक बार screen दोबारा चलाना काफ़ी है। रोज़ चलाने से सिर्फ़ शोर दिखता है।
क्या Screen से मिली कंपनी में पैसा लगाने से कमाई पक्की है?
नहीं। Screen पुराने आंकड़ों पर आधारित है और भविष्य की गारंटी नहीं देती। कंपनी की गुणवत्ता और दाम दोनों मायने रखते हैं, और शेयर बाज़ार में नुकसान का जोखिम हमेशा रहता है।
| SEBI Disclaimer यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है, यह निवेश या trading की सलाह नहीं है। बताई गई screens और उनके आंकड़े शिक्षा के उदाहरण हैं, किसी स्टॉक की खरीद या बिक्री की सिफ़ारिश नहीं। ABC Ltd काल्पनिक कंपनी है। शेयर बाज़ार में पूंजी डूबने का जोखिम है। कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार SEBI-registered सलाहकार से परामर्श लें। |
लेखिका के बारे में
सारिता मिश्रा stockmarketpro.co.in पर हिंदी में शेयर बाज़ार, ट्रेडिंग और पर्सनल फ़ाइनेंस की शैक्षणिक सामग्री लिखती हैं। मकसद है जटिल बातों को असली उदाहरणों और आसान भाषा में समझाना।