F&O में Lot Size और Margin कैसे काम करता है

F&O में आप 1 शेयर या 10 शेयर जैसी मनचाही quantity में trade नहीं कर सकते — यहां सब कुछ Lot Size में होता है, और हर position के लिए एक तय Margin ब्लॉक करनी पड़ती है। यह दोनों concepts समझे बिना कोई भी सही position sizing नहीं कर सकता। इस article में हम समझेंगे कि Lot Size कैसे तय होता है, समय-समय पर क्यों बदलता है, और Margin की गणना असल में कैसे होती है — मौजूदा (2026 तक अपडेटेड) नियमों के साथ।

Key Takeaways Lot Size किसी F&O contract में तय शेयर/यूनिट्स की संख्या है — यह Exchange तय करता है, trader नहींनवंबर 2024 में SEBI के निर्देश पर Index Contracts की न्यूनतम Contract Value ₹5-10 लाख से बढ़ाकर ₹15-20 लाख की गईLot Size समय-समय पर बदलता रहता है ताकि Contract Value एक तय दायरे में बनी रहेOption खरीदने के लिए सिर्फ Premium चाहिए, लेकिन Option बेचने (Writing) के लिए SPAN + Exposure Margin के रूप में कहीं ज्यादा रकम ब्लॉक होती हैExpiry Day पर अतिरिक्त Margin (Extreme Loss Margin) लागू होती है, इसलिए उस दिन जरूरत अचानक बढ़ सकती है
सीधा जवाब Lot Size वह तय संख्या है जितने शेयर/यूनिट्स एक F&O contract में शामिल होते हैं, इसे Exchange समय-समय पर Contract Value को एक तय दायरे में रखने के लिए बदलता रहता है। Margin वह रकम है जो Broker के पास सुरक्षा के तौर पर जमा करनी पड़ती है — Option खरीदने में सिर्फ Premium चाहिए, जबकि Option बेचने और Futures में SPAN और Exposure Margin मिलाकर कहीं बड़ी रकम ब्लॉक होती है।

Lot Size क्या है और क्यों जरूरी है

F&O में हर stock/index का अपना एक तय Lot Size होता है — जैसे अंडे अकेले नहीं, ट्रे में बिकते हैं, वैसे ही F&O contracts अकेली इकाई में नहीं, तय Lot में ही ट्रेड होते हैं। इसकी वजह यह है कि Exchange चाहता है कि हर contract की Value एक उचित दायरे में रहे — न बहुत छोटी (जिससे बहुत कम पूंजी वाले लोग भी बड़ा जोखिम ले लें), न बहुत बड़ी (जिससे आम trader के लिए पहुंच से बाहर हो जाए)।

Lot Size कैसे तय होता है मौजूदा नियम

नवंबर 2024 में SEBI के निर्देश पर एक बड़ा बदलाव हुआ — Index Derivatives (Nifty, Bank Nifty जैसे) की न्यूनतम Contract Value ₹5-10 लाख से बढ़ाकर ₹15-20 लाख कर दी गई। इसका मतलब है कि हर नए contract की शुरुआत में उसकी Value कम-से-कम ₹15 लाख होनी चाहिए, और Exchange समय-समय पर Review करके Lot Size को इस दायरे में बनाए रखता है — अगर Index ऊपर जाए तो Lot Size घटाया जाता है, नीचे जाए तो बढ़ाया जाता है।

Indexपुराना Lot Size (नवंबर 2024 से पहले)नवंबर 2024 के बाद
Nifty 502575 (बाद में समय-समय पर बदलकर घटा/बढ़ा)
Bank Nifty1530
FinNifty2565
Midcap Nifty50120

ध्यान दें: यह सिर्फ एक उदाहरण के तौर पर नवंबर 2024 का बदलाव है — Lot Size इसके बाद भी समय-समय पर बदल चुका है और आगे भी बदलेगा, इसलिए trade से पहले हमेशा अपने Broker के platform या NSE की official जानकारी से मौजूदा Lot Size जरूर verify करें। Stock Options का Lot Size अलग तरीके से, हर stock की अपनी कीमत के हिसाब से तय होता है, और यह Index वाले बदलाव से सीधे प्रभावित नहीं हुआ।

Stock Options का Lot Size, Index से अलग क्यों होता है

हर स्टॉक की कीमत अलग होती है, इसलिए Exchange हर स्टॉक के लिए Lot Size इस तरह तय करता है कि Contract Value लगभग एक समान दायरे में रहे — महंगे स्टॉक का Lot Size छोटा रखा जाता है, सस्ते स्टॉक का बड़ा।

उदाहरण (काल्पनिक)शेयर की कीमतअनुमानित Lot Sizeलगभग Contract Value
सस्ता Stock₹2002,000₹4,00,000
महंगा Stock₹2,000200₹4,00,000

Margin कैसे काम करता है

Positionजरूरी Margin
Option खरीदना (Buying)सिर्फ पूरा Premium — फरवरी 2025 से यह upfront और अनिवार्य है
Option बेचना (Writing/Selling)SPAN Margin + Exposure Margin — Contract Value का एक बड़ा हिस्सा
Futures (खरीदना या बेचना)SPAN Margin + Exposure Margin, दोनों तरफ एक जैसा

SPAN Margin, बाजार में एक दिन में संभावित सबसे बुरे उतार-चढ़ाव को कवर करने के लिए तय होती है, जबकि Exposure Margin उसके ऊपर एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। दोनों मिलाकर वह रकम बनती है जो Option Selling या Futures Trading के लिए Broker के पास रखनी पड़ती है।

Real Worked Example — Buying vs Selling में Margin का फर्क

मान लीजिए Nifty अभी 25,000 पर है, और मौजूदा Lot Size 65 है। एक Call Option का Premium ₹120 है।

तरीकाहिसाबजरूरी रकम (लगभग)
1 Lot Call खरीदना (Buying)सिर्फ Premium: 120 × 65₹7,800
1 Lot Call बेचना (Selling/Writing)SPAN + Exposure Margin (बाजार की स्थिति के हिसाब से बदलता है)लगभग ₹1.75-2 लाख

फर्क साफ है — एक ही Lot के लिए खरीदने में लगभग ₹8,000 चाहिए, जबकि बेचने में लगभग 20-25 गुना ज्यादा Margin ब्लॉक होती है। यही वजह है कि Option Selling के लिए कहीं बड़ी पूंजी चाहिए, और यह रकम रोज बाजार की Volatility के हिसाब से घटती-बढ़ती भी रहती है।

Expiry Day पर Margin अलग क्यों होती है

फरवरी 2025 से लागू नियमों के अनुसार, Expiry Day पर Short (बेचे गए) Index Options पर अतिरिक्त 2% Extreme Loss Margin (ELM) लगती है, और Calendar Spreads (अलग-अलग Expiry के contracts जोड़कर बनाई गई position) को मिलने वाली Margin की छूट भी Expiry Day पर हटा ली जाती है। इसका मतलब है कि जिस दिन बाजार वैसे भी सबसे ज्यादा अनिश्चित होता है (हमारे Expiry Day वाले article में समझाया गया है), उसी दिन Margin जरूरत भी अचानक बढ़ सकती है।

Common गलतियां

इन गलतियों से बचें Lot Size देखे बिना ‘कितने Lot लूं’ सोच लेना, असली Contract Value का हिसाब न लगानाOption Selling में जरूरी Margin को कम आंकना, खासकर Volatility बढ़ने परExpiry Day पर बढ़ी हुई ELM Margin के लिए पहले से तैयार न रहनापुराना (आउटडेटेड) Lot Size याद रखकर उसी हिसाब से Position Size तय करनाMargin में कोई buffer न रखना, ताकि छोटे MTM नुकसान पर भी Margin Call आ जाए

Quick Glossary

Lot Size — एक F&O contract में शामिल शेयर/यूनिट्स की तय संख्या

Contract Value — Lot Size × मौजूदा कीमत — पूरे contract की कुल कीमत

SPAN Margin — एक दिन के संभावित सबसे बुरे नुकसान को कवर करने वाली Margin

Exposure Margin — SPAN के ऊपर लिया जाने वाला अतिरिक्त सुरक्षा कवच

ELM (Extreme Loss Margin) — असामान्य परिस्थितियों (जैसे Expiry Day) के लिए ली जाने वाली अतिरिक्त Margin

Upfront Margin — Trade शुरू करने से पहले ही जमा करनी अनिवार्य Margin

Trader Tip किसी भी नई Strategy को आजमाने से पहले अपने Broker के Margin Calculator में असली Lot Size और मौजूदा Margin जरूर check करें — यह रोज बदलता है। Option Selling करने से पहले सिर्फ न्यूनतम जरूरी Margin नहीं, बल्कि MTM नुकसान झेलने लायक अतिरिक्त buffer भी खाते में रखें (हमारे Option Selling के असली खतरे वाले article में यह विस्तार से समझाया गया है)।

F&O Trading के लिए Broker चुनें

सटीक Margin Calculator और मौजूदा Lot Size की जानकारी के लिए एक भरोसेमंद broker platform जरूरी है।

Zerodha पर account खोलें: यहां क्लिक करें

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यह भी पढ़ें: Option Selling का असली खतरा — SEBI के आंकड़ों के साथ, Theta Decay — Expiry के दिन क्या होता है, और Call Option और Put Option — बिल्कुल आसान भाषा में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Lot Size क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?

Lot Size किसी F&O contract में शामिल शेयर/यूनिट्स की तय संख्या है। इसकी वजह से हर contract की Value एक उचित दायरे में रहती है, यह Exchange तय करता है।

Lot Size कैसे तय होता है?

Exchange, Contract Value (Lot Size × कीमत) को एक तय दायरे (Index के लिए फिलहाल ₹15-20 लाख) में रखने के लिए समय-समय पर Lot Size को Review करके बदलता है।

क्या Lot Size हमेशा एक जैसा रहता है?

नहीं, यह स्थिर नहीं है — जैसे Index ऊपर या नीचे जाता है, Exchange समय-समय पर Lot Size बदलता रहता है ताकि Contract Value तय दायरे में बनी रहे।

Option खरीदने और बेचने में Margin अलग क्यों होता है?

खरीदने में अधिकतम नुकसान सिर्फ Premium तक सीमित है, इसलिए सिर्फ Premium चाहिए। बेचने में नुकसान बड़ा हो सकता है, इसलिए SPAN और Exposure Margin के रूप में कहीं बड़ी रकम ब्लॉक होती है।

SPAN Margin और Exposure Margin में क्या फर्क है?

SPAN Margin एक दिन के संभावित सबसे बुरे नुकसान को कवर करती है, जबकि Exposure Margin उसके ऊपर एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच के तौर पर ली जाती है।

Expiry Day पर Margin ज्यादा क्यों लगती है?

मौजूदा नियमों के अनुसार Short Index Options पर Expiry Day को अतिरिक्त Extreme Loss Margin (ELM) लगती है, और Calendar Spread की Margin छूट भी उस दिन हट जाती है।

Stock Options का Lot Size, Index Options से अलग क्यों होता है?

हर स्टॉक की कीमत अलग होती है, इसलिए Exchange हर स्टॉक के लिए अलग Lot Size तय करता है ताकि Contract Value लगभग एक समान दायरे में रहे — महंगे स्टॉक का Lot Size छोटा, सस्ते का बड़ा।

Margin पूरी न होने पर क्या होता है?

अगर जरूरी Margin समय पर पूरी नहीं की जाती, तो Broker आपकी position को अपने आप, अक्सर खराब कीमत पर, Square-off कर सकता है।

Disclaimer यह article केवल शिक्षा और जानकारी के उद्देश्य से है, यह कोई निवेश सलाह नहीं है। इसमें बताए गए Lot Size, Contract Value और Margin के आंकड़े इस लेख के लिखे जाने के समय के हैं और समय-समय पर SEBI/Exchange के निर्देश पर बदल सकते हैं — trade से पहले हमेशा अपने Broker या NSE की official जानकारी से मौजूदा आंकड़े verify करें। Options और Futures सहित F&O trading उच्च जोखिम वाला माना जाता है। कृपया कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने खुद के विश्लेषण करें या किसी SEBI-registered investment advisor से सलाह लें।

लेखिका: सरिता मिश्रा (Sarita Mishra) फोटो: author photo link

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