स्टॉक मार्केट के 200 जरूरी टर्म्स — Complete Glossary (Hindi)

जब भी हम स्टॉक मार्केट सीखना शुरू करते हैं, सबसे बड़ी दिक्कत होती है — नए-नए अंग्रेज़ी टर्म्स जो हर जगह सुनने को मिलते हैं, चाहे वो न्यूज़ चैनल हो, ब्रोकर का ऐप हो, या कोई फाइनेंस पोस्ट। इस पोस्ट में मैंने स्टॉक मार्केट के 200 सबसे ज़रूरी टर्म्स को 9 आसान categories में बांटकर, हर एक को सरल हिंदी में समझाया है — ताकि आप जब भी कोई नया शब्द सुनें, इसी ग्लॉसरी में तुरंत उसका मतलब ढूंढ सकें।

मुख्य बातें (Key Takeaways): इस ग्लॉसरी में कुल 200 स्टॉक मार्केट टर्म्स को 9 categories में बांटा गया है।Basics, Trading, Technical Analysis, Fundamental Analysis, F&O, IPO, Mutual Funds, Regulatory, और Advanced — सभी ज़रूरी areas cover किए गए हैं।अगर आप नए निवेशक हैं, तो पहले “Basics” और “Mutual Funds” सेक्शन से शुरू करें।Active traders को “Technical Analysis” और “F&O” सेक्शन सबसे ज़्यादा काम आएंगे।इस पेज को bookmark कर लें — जब भी कोई नया टर्म सुनें, यहां सर्च (Ctrl+F) करके तुरंत मतलब ढूंढ सकते हैं।
सीधा जवाब: यह पोस्ट स्टॉक मार्केट के 200 सबसे इस्तेमाल होने वाले टर्म्स की एक complete, category-wise glossary है — Basics से लेकर Advanced Trading Strategies तक, सब कुछ सरल हिंदी में एक ही जगह।

इस ग्लॉसरी में क्याक्या कवर किया गया है (Index)

  • 1. Basics / Fundamentals (आधारभूत शब्द)
  • 2. Trading और Order Types
  • 3. Technical Analysis के शब्द
  • 4. Fundamental Analysis के शब्द
  • 5. Derivatives / F&O के शब्द
  • 6. IPO से जुड़े शब्द
  • 7. Mutual Funds के शब्द
  • 8. Regulatory और Market Structure के शब्द
  • 9. Advanced / अन्य महत्वपूर्ण शब्द

1. Basics / Fundamentals (आधारभूत शब्द)

Stock (शेयर) — किसी कंपनी में स्वामित्व का एक छोटा हिस्सा, जो शेयरधारक को कंपनी के प्रॉफिट और वोटिंग राइट्स में हिस्सेदारी देता है।

Share — Stock का ही दूसरा नाम; कंपनी की equity capital की एक यूनिट।

Equity — कंपनी में मालिकाना हक दर्शाने वाला निवेश, जो debt (कर्ज) से अलग होता है।

Stock Exchange — वह प्लेटफॉर्म (जैसे NSE, BSE) जहां शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं।

Ticker Symbol — किसी कंपनी के शेयर को पहचानने वाला छोटा कोड, जैसे TCS या RELIANCE।

Face Value — शेयर की वह मूल कीमत जो कंपनी के दस्तावेज़ों में तय होती है, market price से अलग होती है।

Market Capitalization — किसी कंपनी के कुल शेयरों की current market value (शेयर price × कुल शेयर संख्या)।

Bull Market — वह दौर जब स्टॉक मार्केट लगातार ऊपर जा रहा हो और investor sentiment positive हो।

Bear Market — वह दौर जब स्टॉक मार्केट लगातार नीचे जा रहा हो और investor sentiment negative हो।

Portfolio — किसी investor के पास मौजूद सभी investments (शेयर, फंड्स, बॉन्ड्स आदि) का समूह।

Diversification — जोखिम कम करने के लिए पैसे को अलग-अलग assets या sectors में बांटकर invest करना।

Dividend — कंपनी द्वारा अपने profit का एक हिस्सा shareholders को दिया जाने वाला भुगतान।

Bonus Shares — कंपनी द्वारा मौजूदा shareholders को मुफ्त में दिए गए अतिरिक्त शेयर।

Stock Split — एक शेयर को कई छोटे शेयरों में बांटना, जिससे price कम हो जाती है पर कुल value वही रहती है।

Book Value — कंपनी की balance sheet के अनुसार प्रति शेयर asset value (assets minus liabilities)।

Blue Chip Stock — बड़ी, financially मजबूत और established कंपनियों के शेयर, जो stable माने जाते हैं।

Penny Stock — बहुत कम price वाले शेयर, जो आमतौर पर छोटी कंपनियों के होते हैं और high risk carry करते हैं।

Volatility — किसी शेयर या मार्केट की price में कितनी तेजी से उतार-चढ़ाव होता है, इसका माप।

Liquidity — किसी शेयर को बिना price पर बड़ा असर डाले जल्दी खरीदने या बेचने की क्षमता।

Index — जैसे Sensex या Nifty, जो चुनिंदा शेयरों के प्रदर्शन के आधार पर पूरे मार्केट की दिशा दिखाता है।

Sensex — BSE का बेंचमार्क इंडेक्स, जो टॉप 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित है।

Nifty 50 — NSE का बेंचमार्क इंडेक्स, जो टॉप 50 कंपनियों के शेयरों पर आधारित है।

Circuit Breaker — मार्केट में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोकने की व्यवस्था।

Lot Size — किसी शेयर या डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड की जाने वाली न्यूनतम मात्रा।

Promoter — कंपनी को शुरू करने या नियंत्रित करने वाला व्यक्ति या ग्रुप, जिसका आमतौर पर सबसे बड़ा stake होता है।

2. Trading और Order Types

Intraday Trading — एक ही ट्रेडिंग दिन के अंदर शेयर खरीदना और बेचना, position रात भर नहीं रखी जाती।

Delivery Trading — शेयर खरीदकर उसे demat account में रखना, जिसे आप जब चाहें बेच सकते हैं।

Buy Order — शेयर खरीदने के लिए दिया गया instruction।

Sell Order — शेयर बेचने के लिए दिया गया instruction।

Bid Price — वह अधिकतम price जो कोई buyer देने को तैयार है।

Ask Price (Offer Price) — वह न्यूनतम price जिस पर कोई seller बेचने को तैयार है।

Bid-Ask Spread — Bid और Ask price के बीच का अंतर।

Limit Order — एक तय price या उससे बेहतर price पर ही खरीदने/बेचने का ऑर्डर।

Market Order — मौजूदा market price पर तुरंत खरीदने/बेचने का ऑर्डर।

Stop Loss Order — नुकसान सीमित करने के लिए एक तय price पर automatic बिक्री का ऑर्डर।

Stop Loss Limit Order — Stop loss जैसा ऑर्डर, लेकिन trigger होने के बाद यह एक limit price पर execute होता है।

GTT (Good Till Triggered) — एक ऐसा ऑर्डर जो तब तक active रहता है जब तक तय price trigger न हो जाए, चाहे कई दिन लग जाएं।

Bracket Order — एक ऑर्डर जिसमें entry, target और stop loss तीनों एक साथ सेट किए जाते हैं।

Cover Order — एक ऑर्डर जिसमें compulsory stop loss के साथ higher leverage मिलता है।

Margin — Broker से लिया गया वह अतिरिक्त फंड जो trade करने के लिए इस्तेमाल होता है।

Leverage — कम पूंजी से बड़ी value का trade करने की क्षमता, margin के जरिए।

Short Selling — शेयर की कीमत गिरने की उम्मीद में पहले बेचना, फिर बाद में कम कीमत पर वापस खरीदना।

Long Position — शेयर खरीदकर price बढ़ने की उम्मीद रखना।

Short Position — शेयर बेचकर price गिरने की उम्मीद रखना।

Squaring Off — Intraday position को दिन खत्म होने से पहले बंद करना (उल्टा ट्रेड करके)।

Contract Note — ब्रोकर द्वारा हर ट्रेड के बाद दिया गया दस्तावेज़, जिसमें सारे charges और details होते हैं।

Settlement — खरीदे/बेचे गए शेयरों और पैसों का आदान-प्रदान पूरा होने की प्रक्रिया।

T+1 Settlement — भारत में मौजूदा नियम, जिसके तहत ट्रेड का settlement अगले ही कारोबारी दिन हो जाता है।

Auction — अगर कोई seller शेयर deliver नहीं कर पाता, तो exchange द्वारा shares खरीदने की प्रक्रिया।

Freeze Quantity — एक ऑर्डर में अधिकतम मात्रा जो एक्सचेंज की सीमा के तहत allowed है।

3. Technical Analysis के शब्द

Candlestick Chart — एक चार्ट जो किसी तय समय में open, high, low और close price दिखाता है।

Chart Pattern — Price movements में बनने वाली आकृतियां, जो future trend का संकेत देती हैं।

Support Level — वह price level जहां गिरावट रुकने और खरीदारी बढ़ने की संभावना होती है।

Resistance Level — वह price level जहां तेजी रुकने और बिकवाली बढ़ने की संभावना होती है।

Trend Line — Price के highs या lows को जोड़ने वाली लाइन, जो overall trend दिखाती है।

Moving Average — एक तय समय की average price, जो trend को smooth करके दिखाती है।

RSI (Relative Strength Index) — एक indicator जो बताता है कि स्टॉक overbought है या oversold, 0-100 के स्केल पर।

MACD — एक momentum indicator जो दो moving averages के बीच के अंतर पर आधारित है।

Bollinger Bands — Price के ऊपर-नीचे बने bands, जो volatility दिखाते हैं।

Volume — किसी तय समय में कितने शेयर ट्रेड हुए, इसकी संख्या।

Breakout — जब price किसी resistance level को पार करके ऊपर जाती है।

Breakdown — जब price किसी support level को तोड़कर नीचे जाती है।

Head and Shoulders — एक chart pattern जो trend reversal का संकेत देता है।

Double Top — एक bearish reversal pattern, जहां price दो बार एक ही level तक जाकर गिरती है।

Double Bottom — एक bullish reversal pattern, जहां price दो बार एक ही level तक गिरकर उछलती है।

Fibonacci Retracement — एक tool जो संभावित support/resistance levels ढूंढने के लिए मैथमेटिकल ratios इस्तेमाल करता है।

Gap Up — जब स्टॉक पिछले दिन के बंद price से ऊपर खुले।

Gap Down — जब स्टॉक पिछले दिन के बंद price से नीचे खुले।

Overbought — जब कोई स्टॉक बहुत तेजी से बढ़ चुका हो और correction की संभावना बने।

Oversold — जब कोई स्टॉक बहुत तेजी से गिर चुका हो और उछाल की संभावना बने।

ATR (Average True Range) — एक indicator जो किसी स्टॉक की volatility को मापता है।

Doji — एक candlestick pattern जहां open और close price लगभग बराबर हों, indecision दिखाता है।

Bullish Candle — एक candlestick जो price के ऊपर जाने का संकेत देता है (close > open)।

Bearish Candle — एक candlestick जो price के नीचे जाने का संकेत देता है (close < open)।

Trend Reversal — जब मौजूदा trend (up या down) दिशा बदलकर उल्टा हो जाए।

4. Fundamental Analysis के शब्द

EPS (Earnings Per Share) — कंपनी का net profit प्रति शेयर, जो profitability दिखाता है।

P/E Ratio — Price to Earnings ratio, जो बताता है कि शेयर की कीमत उसकी earnings के मुकाबले कितनी महंगी या सस्ती है।

P/B Ratio — Price to Book ratio, शेयर की market price की तुलना उसकी book value से करता है।

ROE (Return on Equity) — Shareholders के पैसे पर कंपनी कितना profit कमा रही है, इसका माप।

ROCE (Return on Capital Employed) — कंपनी अपनी कुल पूंजी पर कितना efficient return generate कर रही है।

Debt-to-Equity Ratio — कंपनी के कुल कर्ज की तुलना उसकी equity capital से।

Balance Sheet — कंपनी के assets, liabilities और equity की एक तय तारीख पर स्थिति दिखाने वाला दस्तावेज़।

Income Statement (P&L) — कंपनी की एक अवधि की revenue, expenses और profit/loss दिखाने वाला दस्तावेज़।

Cash Flow Statement — कंपनी में पैसा कहां से आया और कहां गया, इसका ब्यौरा।

Dividend Yield — सालाना dividend की शेयर की current price से तुलना, प्रतिशत में।

Payout Ratio — कंपनी अपने profit का कितना हिस्सा dividend के रूप में देती है।

Intrinsic Value — किसी शेयर की वास्तविक (fundamental) value, जो market price से अलग हो सकती है।

Peer Comparison — किसी कंपनी की तुलना उसी सेक्टर की अन्य कंपनियों से करना।

Sector Analysis — किसी विशेष industry sector के trends और performance का अध्ययन।

Promoter Holding — किसी कंपनी में promoters के पास मौजूद शेयरों का प्रतिशत।

FII (Foreign Institutional Investor) — विदेशी संस्थाएं जो भारतीय शेयर बाजार में निवेश करती हैं।

DII (Domestic Institutional Investor) — घरेलू संस्थाएं (जैसे mutual funds, insurance companies) जो शेयर बाजार में निवेश करती हैं।

Free Float — किसी कंपनी के वे शेयर जो promoters के पास न होकर आम जनता के पास ट्रेड करने के लिए उपलब्ध हों।

Retained Earnings — कंपनी का वह profit जो dividend के रूप में न बांटकर business में दोबारा invest किया जाता है।

Net Profit Margin — कंपनी की total revenue का कितना हिस्सा net profit में बदलता है, प्रतिशत में।

Operating Margin — Core business operations से होने वाला profit, revenue के प्रतिशत में।

Working Capital — कंपनी की short-term assets minus short-term liabilities, दैनिक operations चलाने के लिए जरूरी।

Market Cap Categories — कंपनियों को Large Cap, Mid Cap और Small Cap में उनकी market value के आधार पर बांटा जाता है।

Contingent Liability — कंपनी की वह संभावित देनदारी जो किसी भविष्य की घटना पर निर्भर हो।

Related Party Transaction — कंपनी का अपने promoters, directors या group companies के साथ किया गया लेनदेन।

5. Derivatives / F&O के शब्द

Derivative — एक financial contract जिसकी value किसी underlying asset (जैसे शेयर या index) से तय होती है।

Futures Contract — एक तय price पर भविष्य की तारीख में asset खरीदने/बेचने का अनिवार्य contract।

Options Contract — एक contract जो खरीदार को असेट खरीदने/बेचने का अधिकार देता है, पर बाध्यता नहीं।

Call Option — एक option जो खरीदार को तय price पर asset खरीदने का अधिकार देता है।

Put Option — एक option जो खरीदार को तय price पर asset बेचने का अधिकार देता है।

Strike Price — वह तय price जिस पर option खरीदने/बेचने का अधिकार मिलता है।

Premium (Options) — Option खरीदने के लिए चुकाई जाने वाली कीमत।

Expiry Date — वह तारीख जिस दिन futures या options contract खत्म हो जाता है।

In the Money (ITM) — जब option exercise करने पर तुरंत profit मिलता हो।

Out of the Money (OTM) — जब option exercise करने पर कोई profit न मिले।

At the Money (ATM) — जब strike price और current market price लगभग बराबर हों।

Open Interest — किसी futures/options contract में अभी तक कितने positions खुले हुए हैं, इसकी संख्या।

Hedging — मौजूदा निवेश को नुकसान से बचाने के लिए derivatives का इस्तेमाल करना।

Speculation — Price movement का अनुमान लगाकर profit कमाने की कोशिश करना, high risk के साथ।

Arbitrage — एक ही asset की अलग-अलग बाजारों में price के अंतर से बिना जोखिम profit कमाना।

Margin Call — जब broker अतिरिक्त पैसा जमा करने को कहे क्योंकि account की margin कम हो गई है।

Mark to Market (MTM) — रोज़ाना position की value को current market price के अनुसार अपडेट करना।

Rollover — किसी expiring contract की position को अगले महीने के contract में शिफ्ट करना।

Option Greeks — Delta, Theta, Gamma, Vega जैसे measures जो option की price sensitivity दिखाते हैं।

Lot Size (F&O) — F&O कॉन्ट्रैक्ट में तय की गई न्यूनतम ट्रेडिंग मात्रा।

6. IPO से जुड़े शब्द

IPO (Initial Public Offering) — जब कोई प्राइवेट कंपनी पहली बार अपने शेयर आम जनता को बेचती है।

FPO (Follow-on Public Offering) — पहले से लिस्टेड कंपनी द्वारा नए शेयर जारी करना।

Book Building — IPO प्राइस तय करने की एक प्रक्रिया, जिसमें investors अलग-अलग price पर bid करते हैं।

Price Band — IPO में तय की गई न्यूनतम और अधिकतम price की रेंज।

Cut-off Price — IPO में तय की गई final price, जो price band के अंदर होती है।

Anchor Investor — बड़े संस्थागत निवेशक जो IPO खुलने से पहले शेयर खरीदते हैं।

Grey Market Premium (GMP) — अनौपचारिक बाजार में IPO शेयर किस प्रीमियम पर ट्रेड हो रहे हैं, इसका संकेत।

Listing Day — वह दिन जब IPO के शेयर पहली बार stock exchange पर ट्रेड होना शुरू करते हैं।

Allotment — IPO में apply करने वाले investors को शेयर मिलने की प्रक्रिया।

Oversubscription — जब किसी IPO के लिए उपलब्ध शेयरों से ज्यादा demand आ जाए।

ASBA — IPO apply करने का तरीका, जिसमें पैसा तब तक अकाउंट में ही रहता है जब तक allotment न हो।

DRHP (Draft Red Herring Prospectus) — IPO से पहले SEBI को जमा किया गया दस्तावेज़, जिसमें कंपनी की पूरी जानकारी होती है।

QIB (Qualified Institutional Buyer) — बड़ी संस्थाएं जैसे mutual funds, banks जो IPO के एक तय हिस्से में apply कर सकती हैं।

Retail Investor Category — IPO का वह हिस्सा जो छोटे (retail) निवेशकों के लिए आरक्षित होता है।

Lock-in Period — IPO के बाद वह समय जिसमें promoters या anchor investors अपने शेयर बेच नहीं सकते।

7. Mutual Funds के शब्द

NAV (Net Asset Value) — Mutual fund की प्रति यूनिट कीमत।

SIP (Systematic Investment Plan) — हर महीने एक तय राशि mutual fund में निवेश करने का तरीका।

Lumpsum Investment — Mutual fund में एक साथ पूरी राशि निवेश करना।

Expense Ratio — Mutual fund द्वारा management और operations के लिए लिया जाने वाला सालाना चार्ज, प्रतिशत में।

AMC (Asset Management Company) — वह कंपनी जो mutual fund schemes को manage करती है।

Exit Load — Mutual fund से तय समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाला चार्ज।

AUM (Assets Under Management) — किसी fund या AMC द्वारा manage किए जा रहे कुल पैसे की राशि।

Equity Fund — Mutual fund जो मुख्यतः शेयरों में निवेश करता है।

Debt Fund — Mutual fund जो मुख्यतः bonds और fixed income instruments में निवेश करता है।

Hybrid Fund — Mutual fund जो equity और debt दोनों में निवेश करता है।

Index Fund — Mutual fund जो किसी index (जैसे Nifty 50) की नकल करता है।

ELSS — एक tax-saving mutual fund, जिसमें 3 साल का lock-in होता है।

Direct Plan — Mutual fund plan जिसे बिना distributor के सीधे खरीदा जाता है, कम expense ratio के साथ।

Regular Plan — Mutual fund plan जो distributor/advisor के जरिए खरीदा जाता है, थोड़े ज्यादा expense ratio के साथ।

Growth Option — Mutual fund option जिसमें profit दोबारा invest हो जाता है, payout नहीं मिलता।

Dividend/IDCW Option — Mutual fund option जिसमें profit का कुछ हिस्सा समय-समय पर investor को दिया जाता है।

Fund Manager — वह व्यक्ति जो mutual fund scheme के निवेश निर्णय लेता है।

Benchmark Index — वह index जिससे किसी fund के प्रदर्शन की तुलना की जाती है।

CAGR — किसी निवेश की सालाना औसत growth rate, compounding के साथ।

XIRR — अलग-अलग समय पर किए गए कई निवेशों (जैसे SIP) का actual return calculate करने का तरीका।

8. Regulatory और Market Structure के शब्द

SEBI — भारत का capital market regulator, जो investors की सुरक्षा और market को नियंत्रित करता है।

NSE (National Stock Exchange) — भारत का सबसे बड़ा stock exchange।

BSE (Bombay Stock Exchange) — एशिया का सबसे पुराना stock exchange, भारत में स्थित।

Depository — वह संस्था जो शेयरों को electronic (dematerialized) रूप में रखती है, जैसे NSDL और CDSL।

NSDL — भारत की एक प्रमुख depository संस्था।

CDSL — भारत की दूसरी प्रमुख depository संस्था।

Demat Account — वह अकाउंट जिसमें आपके शेयर electronic रूप में रखे जाते हैं।

Trading Account — वह अकाउंट जिसके जरिए आप शेयर खरीदने/बेचने का ऑर्डर देते हैं।

Depository Participant (DP) — Broker या bank जो investors और depository के बीच की कड़ी होता है।

KYC (Know Your Customer) — Investor की पहचान और पते को verify करने की प्रक्रिया।

PAN Card — Trading और demat account खोलने के लिए जरूरी एक identification नंबर।

SCORES — SEBI का online complaint portal, जहां investors शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

STT (Securities Transaction Tax) — शेयर लेनदेन पर लगने वाला एक सरकारी टैक्स।

Stamp Duty — शेयर लेनदेन पर राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स।

Circuit Filter — किसी स्टॉक की एक दिन में अधिकतम ऊपर या नीचे जाने की सीमा।

Insider Trading — कंपनी की गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल करके शेयर ट्रेड करना, जो illegal है।

Front Running — Broker या advisor द्वारा client के ऑर्डर से पहले खुद के लिए ट्रेड करना, जो illegal है।

Market Manipulation — जानबूझकर किसी शेयर की price को गलत तरीके से प्रभावित करना।

Investor Protection Fund (IPF) — Stock exchange द्वारा बनाया गया फंड, जो broker default होने पर investors को compensate करता है।

Market-wide Circuit Breaker — पूरे मार्केट में अत्यधिक गिरावट पर ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोकने की व्यवस्था।

9. Advanced / अन्य महत्वपूर्ण शब्द

Beta — किसी स्टॉक की volatility की तुलना पूरे मार्केट से, यह दर्शाने वाला measure।

Alpha — Fund manager या स्ट्रेटेजी द्वारा बेंचमार्क से ज्यादा जनरेट किया गया return।

Sharpe Ratio — Risk के मुकाबले मिलने वाले return को मापने वाला ratio।

Standard Deviation — किसी निवेश के returns में उतार-चढ़ाव की मात्रा।

Correlation — दो assets की price movements एक-दूसरे से कितनी जुड़ी हैं, इसका माप।

Sector Rotation — Investors द्वारा पैसे को एक sector से दूसरे sector में शिफ्ट करने की strategy।

Value Investing — कम price पर अच्छी fundamentals वाले शेयर खरीदने की strategy।

Growth Investing — तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में निवेश करने की strategy, भले ही valuation ज्यादा हो।

Contrarian Investing — मार्केट के मौजूदा trend के उलट निवेश करने की strategy।

Momentum Trading — जो स्टॉक्स तेजी से चल रहे हैं, उन्हें follow करके ट्रेड करने की strategy।

Swing Trading — कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक position होल्ड करने की trading style।

Scalping — बहुत छोटे price movements से जल्दी-जल्दी छोटा profit कमाने की trading style।

Algo Trading — Computer programs के जरिए automatic रूप से trade execute करना।

Dark Pool — एक private trading platform जहां बड़े trades बिना public जानकारी के होते हैं।

Block Deal — एक बड़ी मात्रा में शेयरों का single transaction, एक तय minimum value से ऊपर।

Bulk Deal — एक दिन में किसी एक शेयर की कुल ट्रेडेड मात्रा के एक तय प्रतिशत से ज्यादा का लेनदेन।

Buyback — कंपनी द्वारा अपने ही शेयर बाजार से वापस खरीदना।

Rights Issue — मौजूदा shareholders को discounted price पर नए शेयर खरीदने का अधिकार देना।

Merger — दो कंपनियों का आपस में मिलकर एक कंपनी बन जाना।

Acquisition — एक कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी को खरीद लेना।

Delisting — किसी कंपनी के शेयरों को stock exchange से हटा देना।

Trading Suspension — किसी शेयर की ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोक देना, आमतौर पर किसी जांच या नियम उल्लंघन के कारण।

Watchlist — Investors द्वारा नजर रखने के लिए बनाई गई शेयरों की सूची।

Portfolio Rebalancing — समय-समय पर पोर्टफोलियो में assets के अनुपात को फिर से सही करना।

Asset Allocation — निवेश को इक्विटी, डेट, गोल्ड जैसी अलग-अलग asset categories में बांटने की strategy।

निवेशक टिप: एक बार में सारे 200 टर्म्स याद करने की कोशिश न करें। एक category चुनें (जैसे Basics), उसे अच्छे से समझें, फिर असली चार्ट्स या अपने ट्रेडिंग ऐप में उन टर्म्स को ढूंढकर practice करें — इससे यह टर्म्स जल्दी और पक्के तौर पर याद हो जाते हैं।

अगर आप इन टर्म्स को असली ट्रेडिंग में इस्तेमाल करना शुरू करना चाहते हैं, तो यह ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म्स ट्राय करें:

ज़ेरोधा अकाउंट खोलें

अपस्टॉक्स अकाउंट खोलें

एंजल वन अकाउंट खोलें

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Stock market शुरू करने के लिए सबसे ज़रूरी टर्म्स कौन से हैं?

शुरुआत के लिए Demat Account, Trading Account, Stock, Share, Bull Market, Bear Market, और Index जैसे basic terms समझना सबसे ज़रूरी है — यह इस ग्लॉसरी के “Basics” सेक्शन में कवर किए गए हैं।

Technical Analysis के टर्म्स क्यों ज़रूरी हैं?

Technical Analysis के टर्म्स (जैसे RSI, MACD, Support, Resistance) short-term ट्रेडिंग डिसीज़न लेने में मदद करते हैं, खासकर intraday और swing traders के लिए।

क्या मुझे F&O टर्म्स सीखने चाहिए अगर मैं सिर्फ डिलीवरी में इन्वेस्ट करता हूं?

नहीं, अगर आप सिर्फ long-term delivery investor हैं, तो F&O (Futures & Options) टर्म्स तुरंत ज़रूरी नहीं हैं — पहले Basics, Fundamental Analysis, और Mutual Fund टर्म्स पर फोकस करें।

Fundamental Analysis के सबसे ज़रूरी ratios कौन से हैं?

EPS, P/E Ratio, ROE, और Debt-to-Equity Ratio किसी भी कंपनी को analyze करने के लिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले fundamental ratios हैं।

NAV क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?

NAV (Net Asset Value) mutual fund की per-unit price होती है — इस ग्लॉसरी में “Mutual Funds” सेक्शन के अंदर इसे विस्तार से कवर किया गया है।

क्या यह ग्लॉसरी beginners के लिए है या experienced traders के लिए भी?

दोनों के लिए — Basics और Mutual Funds सेक्शन beginners के लिए हैं, जबकि Technical Analysis, F&O, और Advanced Terms सेक्शन experienced traders के लिए उपयोगी हैं।

नए टर्म्स याद रखने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

एक समय में एक category (जैसे Basics या Technical Analysis) पढ़ें, उन्हें असली ट्रेड्स या चार्ट्स में अप्लाई करके practice करें — इससे टर्म्स जल्दी याद हो जाते हैं।

क्या इस ग्लॉसरी में सभी 200 टर्म्स एक ही पोस्ट में मिल जाएंगे?

हां, सभी 200 टर्म्स इसी पोस्ट में 9 categories में व्यवस्थित करके दिए गए हैं, ताकि आपको अलग-अलग पोस्ट्स खोजने की ज़रूरत न पड़े।

SEBI डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ शैक्षिक (एजुकेशनल) उद्देश्य के लिए है और इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। मैं SEBI-रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र नहीं हूं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइज़र या टैक्स कंसल्टेंट से सलाह अवश्य लें। स्टॉक मार्केट निवेश जोखिमों के अधीन हैं।

सरिता मिश्रा

स्टॉक मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर लिखती हूं, ताकि हर रिटेल निवेशक को सरल हिंदी में सही जानकारी मिले।

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