Share Market

शेयर क्या होता है

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सामान्य भाषा मे जब हम शेयर की बात करते हैं तो हमारा मतलब किसी कंपनी के इक्विटी शेयर(Equity Share) से होता है। शेयर और स्टाक आमतौर पर एक ही अर्थ रखते हैं अमेरिकी भाषा में “स्टॉक” शब्द का उपयोग प्रचलित है। इक्विटी शेयर(Equity Share) किसी कंपनी में आपके स्वामित्व का प्रमाण होता है यह प्रमाण शेयर सर्टिफिकेट नाम के दस्तावेज के रूप में आपके पास रहता है आजकल यह शेयर आमतौर पर डीमैटीरियालाइज्ड या इलेक्ट्रॉनिक रूप में नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के किसी डिपॉजिटरी या न्यास अधिकारी सदस्य संस्थान( बैंक, ब्रोकर, वित्तीय संस्थान) के पास रखे जाते हैं। यदि आप चाहे तो अब भी शेयर को फिजिकल फॉर्म अर्थात शेयर सर्टिफिकेट के रूप में रख सकते हैं जिस पर आपका नाम अंकित होता है और जो कंपनी में आपके स्वामित्व का प्रमाण होता है। आपके स्वामित्व अधिकार आप के शेयरों की संख्या के अनुपात में होते हैं। उदाहरण के लिए अगर ABC लिमिटेड नामक कंपनी ने यह 10000 शेयर जारी किए जिसमें से आपने 100 शेयर खरीदे तो आप कंपनी में 1% के मालिक हैं अर्थात कंपनी की जमीन फैक्ट्री उपकरण व अन्य संपत्ति में से 1% पर आपका सानिध्य है अतः जब आप शेयरों में निवेश करते हैं तो आप कंपनी के स्वामित्व में हिस्सा खरीदते हैं।

कंपनियां एक तय मूल्य पर शेयर जारी करती हैं जो उस शेयर की फेस वैल्यू या पार वैल्यू होती है यह मूल्य शेयर सर्टिफिकेट पर स्पष्ट अंकित होता है भारतीय कंपनियों के अधिकतर शहरों की फेस वैल्यू ₹10 होती है पर अब कुछ कंपनियों ने ₹10 का शेयर ₹5, ₹2 व ₹1 तक के शेयरों में विभाजित कर दिया है फेस वैल्यू या पार वैल्यू कंपनी के खातों में शेयर का सांकेतिक मूल्य होता है। यह समझना बहुत आवश्यक है कि बाजार में शेयर का भाव निरंतर चढ़ता या गिरता रहता है और उसका फेस वैल्यू से कोई संबंध नहीं है पर शेयर पर लाभांश शेयर की पार वैल्यू के आधार पर दिया जाता है। कंपनी के खातों में शेयर का मूल्य हमेशा उसकी फेस वैल्यू को ही दर्शाता है बाद में वह शेयर बाजार में किसी भी भाव पर खरीदा या बेचा जाए।

शेयर के प्रकार

कंपनी अधिनियम 2013 धारा 43 के अनुसार किसी भी सीमित दायित्व वाली तथा सार्वजनिक कंपनिया दो प्रकार के शेयर निर्गमित करती है :-

  1. इक्विटी शेयर(Equity Share)
  2. प्रिफरेंश शेयर(Preference Share)

इक्विटी शेयर(Equity Share)

इक्विटी शेयर (Equity Share) वह शेयर होते है जो प्राइमरी तथा सेकंडरी मार्केट से निवेशक प्राप्त करता है। इक्विटी शेयर धारक कंपनी के वास्तविक स्वामी होते है, जो कंपनी के लाभ व नुकसान से जुड़े रहते है। इस प्रकार का शेयरधारक कंपनी का आंशिक हिस्सेदार होता है तथा कंपनी के नफे-नुकसान से जुड़ा रहता है । इक्विटी शेयर धारक अपने द्वारा क्रय किए गए शेयर की संख्या के अनुपात में कंपनी पर मालिकाना अधिकार रखता है. उसको कंपनी के मामलों में वोटिंग का अधिकार भी होता है। यदि कंपनी अपना व्यवसाय पूर्ण रूप से समाप्त करती है, तब कंपनी अपनी सारी देनदारी चुकता करने के बाद बची हुई पूँजी संपत्ति को इन साधारण शेयरधारकों को उनकी शेयर संख्या के अनुपात से वितरित करती है।इन शेयरों पर लाभांश की कोई गारंटी नहीं होती है।

प्रिफरेंश शेयर(Preference Share)

प्रिफरेंश शेयर(Preference Share) वह शेयर होते है जो कंपनी अपने चुनिंदा निवेशकों, प्रोमोटरों तथा दोस्ताना निवेशकों को नीतिगत रूप से जारी करती है।प्रिफरेंस शेयरधारक को लाभ में से सबसे पहले हिस्सा मिलता है; लेकिन इन्हें कंपनी का हिस्सेदार नहीं माना जाता है।प्रिफरेंस शेयरों की कीमत इक्विटी शेयर की मौजूदा कीमत से अलग भी हो सकती है। प्रिफरेंस शेयरधारकों को वोट देने का अधिकार नहीं होता। इन शेयरों पर लाभांश की दर तय होती है. किसी भी कारणवश अगर कंपनी बंद हो जाती है तो पहला अधिकार प्रेफरेंस शेयर धारकों को दिया जाता है, और इन्हें इक्विटी शेयर धारकों से पहले लाभांश और मूलधन का भुगतान किया जाता है. शेयर होल्डर को अपना पहला लाभांश लाभांश के दर से मिलता है. इसमें चाहे कंपनी लाभ में हो या नुकसान में।

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