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“IPO से पहले अगर किसी की नजर सबसे पहले लगती है, तो वो Anchor Investors की होती है — जानिए क्यों ये ‘बड़े खिलाड़ी’ आपके निवेश को दिशा देते हैं।”

जब भी कोई बड़ा IPO आता है, तो उससे पहले एक खबर ज़रूर आती है —

“XYZ IPO को ₹1,200 करोड़ की Anchor Investment मिली।”
“Anchor Investors में शामिल हुए LIC, SBI MF, और HDFC MF…”

पर सवाल ये है —
Anchor Investors होते कौन हैं?
और ये क्यों तय करते हैं कि IPO हिट होगा या फ्लॉप?

आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।


🧩 Anchor Investors कौन होते हैं?

Anchor Investors वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं जो IPO खुलने से एक दिन पहले ही कंपनी के शेयर खरीदते हैं।
इनका मकसद IPO को stability और credibility देना होता है।

यह निवेशक:

  • Mutual Funds
  • Insurance Companies
  • Pension Funds
  • Foreign Portfolio Investors (FPIs)
  • और बड़े बैंक/निवेश फंड्स हो सकते हैं।

📌 SEBI नियमों के अनुसार, Anchor Investors को IPO allotment बिना bidding के किया जाता है, लेकिन एक lock-in period के साथ।


📅 Anchor Investment कब होती है?

Anchor Investor की बुक बिल्डिंग IPO खुलने से एक दिन पहले होती है।
मतलब:

अगर IPO 25 तारीख को खुल रहा है, तो Anchor Investors को 24 तारीख को शेयर अलॉट हो जाते हैं।


🎯 Anchor Investors का मुख्य उद्देश्य

  1. Confidence पैदा करना:
    बड़े नाम देखकर छोटे निवेशकों को भरोसा होता है कि कंपनी मजबूत है।
  2. Stability देना:
    Anchor निवेश से demand early ही establish हो जाती है, जिससे pricing stable रहती है।
  3. Signal देना:
    अगर LIC, SBI MF, या बड़े Foreign Investors हिस्सा ले रहे हैं — तो लोग मानते हैं कि ये IPO ‘safe’ है।

📈 Anchor Investors के लिए नियम क्या हैं?

RuleDetail
Minimum Application Size₹10 करोड़ या उससे अधिक
Lock-in Period30 days from allotment (for 50%)
Allotment DateIPO से एक दिन पहले
BiddingFixed Price — No competition
No Exit Before Lock-inनहीं तो trust और price गिर सकता है

🎯 SEBI इन्हें Regulate करता है ताकि छोटे निवेशकों का भरोसा बना रहे।


💡 Anchor Investment से Retail Investors को क्या फायदा?

Market Signal मिलता है:
अगर बड़े फंड्स भरोसा दिखा रहे हैं, तो यह अच्छा संकेत हो सकता है।

Volatility कम होती है:
IPO listing से पहले ही demand generate होने से price stability बढ़ती है।

Better Allotment Odds:
Strong anchor participation से IPO oversubscription होता है — जिससे clear होता है कि आपको allotment मिल सकता है या नहीं।


⚠️ क्या Anchor Investors की Entry से IPO फुल-प्रूफ हो जाता है?

बिलकुल नहीं।

कुछ केस में Anchor Investors भी short-term listing gain के लिए आते हैं।
30 दिन के बाद अगर वे exit करते हैं, तो price गिर सकता है।

📉 उदाहरण:
Paytm और Zomato जैसे IPO में Anchor Investors ने invest तो किया, लेकिन listing के कुछ हफ्तों में exit कर लिया — जिससे price में गिरावट आई।


🧠 Anchor Investors के नाम देखकर क्या ध्यान रखें?

  1. कौन-कौन शामिल हैं?
    क्या यह reputed Mutual Funds हैं या छोटे FIIs?
  2. Allocation कितना हुआ है?
    Anchor investors को issue का कितना हिस्सा दिया गया है?
  3. Past performance देखें:
    क्या वो फंड हर IPO में हिस्सा लेते हैं या selective हैं?

🧾 निष्कर्ष (Conclusion)

Anchor Investors IPO के लिए foundation बिछाते हैं —
लेकिन इनकी presence को एक संकेत मानिए, फैसले का आधार नहीं

“Anchor Investor की entry निवेश की guarantee नहीं — बस एक दिशा है, रास्ता आपको खुद चुनना होगा।”

FAQ Section (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Anchor Investors कौन होते हैं?

Anchor Investors वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं जो IPO खुलने से एक दिन पहले ही कंपनी के शेयर खरीदते हैं। ये IPO में भरोसा और स्थिरता लाने के लिए अहम भूमिका निभाते हैं।

Anchor Investors को शेयर कैसे मिलते हैं?

इन्हें बिना बोली लगाए, एक तय कीमत पर शेयर दिए जाते हैं। SEBI के नियमों के अनुसार इनका एक निश्चित lock-in period भी होता है।

क्या Anchor Investors की मौजूदगी IPO को सुरक्षित बनाती है?

ये एक सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन निवेश का फैसला केवल Anchor Participation देखकर नहीं लेना चाहिए। DRHP और कंपनी का फंडामेंटल भी ज़रूरी है।

Anchor Investors और Retail Investors में क्या फर्क है?

Anchor Investors संस्थागत होते हैं जो करोड़ों में निवेश करते हैं, जबकि Retail Investors छोटे निवेशक होते हैं जो IPO में ₹15,000–₹2 लाख तक का निवेश करते हैं।

अगर आप Anchor Investors की भूमिका समझ चुके हैं, तो यह भी जानना जरूरी है कि IPO से पहले DRHP में क्या छिपा होता है।
👉 ज़रूर पढ़ें: DRHP में Hidden Warning Signs कैसे पकड़ें?

3 Replies to “Anchor Investors कौन होते हैं और क्यों ज़रूरी हैं?

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