“शेयर मार्केट में दो शब्द हमेशा सुनने को मिलते हैं – IPO और FPO। लेकिन क्या आप जानते हैं दोनों में क्या फर्क है और किसमें निवेश ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है?”
शेयर मार्केट में नए निवेशकों के लिए IPO और FPO थोड़ा confusing हो सकता है।
दोनों में कंपनी अपने शेयर जनता को बेचती है, लेकिन उनका मकसद, टाइमिंग और इफेक्ट अलग होता है।
इस ब्लॉग में हम आपको बेहद आसान भाषा में समझाएंगे कि:
- IPO और FPO क्या होते हैं?
- इन दोनों में क्या मुख्य अंतर है?
- और निवेश के नज़रिए से कौन सा बेहतर विकल्प हो सकता है?
📘 IPO क्या होता है?
IPO (Initial Public Offering) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक को बेचती है।
इसका उद्देश्य होता है कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट कराना और पब्लिक से पूंजी जुटाना।
📌 उदाहरण:
जब Zomato ने 2021 में पहली बार अपने शेयर मार्केट में लॉन्च किए, वह IPO था।
📗 FPO क्या होता है?
FPO (Follow-on Public Offering) तब आता है जब कोई कंपनी पहले से ही स्टॉक मार्केट में लिस्टेड होती है और बाद में दोबारा नए शेयर पब्लिक को बेचती है।
इसका उद्देश्य होता है:
- विस्तार के लिए पैसा जुटाना
- कर्ज चुकाना
- या Promoters की हिस्सेदारी कम करना
📌 उदाहरण:
ONGC और YES Bank जैसे बड़े नामों ने पहले IPO लाया, फिर सालों बाद FPO भी जारी किया।
📊 IPO और FPO में क्या अंतर है?
| पॉइंट | IPO | FPO |
|---|---|---|
| मतलब | पहली बार शेयर जारी करना | पहले से लिस्टेड कंपनी द्वारा दोबारा शेयर जारी करना |
| कंपनी का Status | Private से Public बनती है | पहले से ही Public होती है |
| Risk Level | ज़्यादा (नई कंपनी) | कम (डेटा और इतिहास उपलब्ध) |
| जानकारी उपलब्ध | सीमित | ज़्यादा |
| Valuation | मुश्किल होता है | अपेक्षाकृत स्पष्ट होता है |
✅ निवेश के नज़रिए से क्या समझें?
- IPO में निवेश high risk-high return का गेम हो सकता है।
- FPO ज़्यादा डेटा-आधारित होता है, क्योंकि कंपनी पहले से पब्लिक है और उसके financials खुले होते हैं।
🎯 निवेशक को दोनों का सही समय और उद्देश्य समझकर निर्णय लेना चाहिए।
⚠️ किन बातों का ध्यान रखें?
| IPO में | FPO में |
|---|---|
| DRHP ज़रूर पढ़ें | पिछला performance देखें |
| Promoters की credibility जांचें | कर्ज और equity dilution देखें |
| Grey Market Premium (GMP) देखें | Market conditions का असर समझें |
🧾 निष्कर्ष (Conclusion)
IPO और FPO दोनों के अपने-अपने फायदे और जोखिम हैं।
- IPO में early entry advantage होता है लेकिन uncertainty भी।
- FPO में company को हम बेहतर समझ पाते हैं, इसलिए ज़्यादा informed decision लिया जा सकता है।
“निवेश वही करें जो आप समझें। IPO और FPO दोनों में मौका है — लेकिन समझदारी ज़रूरी है।”
FAQ Section (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
क्या IPO और FPO दोनों में आम आदमी निवेश कर सकता है?
हाँ, दोनों में retail investors निवेश कर सकते हैं। लेकिन FPO में अक्सर allotment आसान होता है क्योंकि competition कम होता है।
क्या FPO में ज़्यादा फायदा होता है?
FPO में कंपनी पहले से लिस्टेड होती है, तो उसका डेटा उपलब्ध होता है। इसलिए decision ज़्यादा informed हो सकता है, लेकिन returns अक्सर moderate होते हैं।
IPO और FPO में allotment का तरीका क्या होता है?
दोनों में Book Building Process के तहत bidding होती है। IPO में oversubscription ज़्यादा होता है, इसलिए allotment मिलना मुश्किल हो सकता है।
क्या IPO और FPO में taxation नियम अलग होते हैं?
नहीं, दोनों में taxation नियम समान होते हैं जैसे capital gains tax आदि।
अगर आप IPO और FPO के बीच का फर्क समझ चुके हैं, तो अब ये जानना ज़रूरी है कि Anchor Investors की भूमिका क्या होती है।
👉 पढ़ें: Anchor Investors कौन होते हैं और क्यों ज़रूरी हैं?
📚 अधिक जानें:
IPO और FPO से जुड़े नियम और सेबी (SEBI) की गाइडलाइंस जानने के लिए देखें:
👉 SEBI Official Website – Public Issues Guidelines
📘 National Stock Exchange द्वारा प्रकाशित:
IPO और FPO से संबंधित प्रक्रियाएं, पात्रता, और दस्तावेज़ों की जानकारी:
👉 NSE India – Public Issues Overview
📚 Want a global perspective in English?
Here’s a trusted breakdown of the key differences between IPOs and FPOs:
👉 Investopedia – IPO vs FPO Explained
